म्यूचुअल फंड के प्रकार- Mutual fund types in hindi

Mutual fund types

तीसरा भाग- म्यूचुअल फंड के प्रकार  Mutual fund types in Hindi

अब तक आप सब जान ही चुके है की म्यूचुअल फंड में सभी प्रकार के निवेशक निवेश कर सकते है चाहे वे छोटे हो या बड़े| ऐसा इसलिए है क्योंकि म्यूचुअल फंड इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है की वह सारे निवेशकों की ज़रूते पूरी कर सके| तो चलो जानते है की म्यूचुअल फंड के कौनसे प्रकार है|

म्यूचुअल फंड्स के तीन प्रकार होते है – डेब्ट फंड , इक्विटी फंड और बैलेंस्ड फंड | Mutual fund types in hindi

डेब्ट फंड क्या है? Debt Fund kya hai? Mutual fund types in Hindi 

 डेब्ट म्यूचुअल फंड्स फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते है, जैसे की ट्रेज़री बिल्स, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, अदि| इन सारे बॉन्ड्स की अपनी अलग मैच्योरिटी होती है| इनका रेट ऑफ़ रिटर्न फिक्स्ड होता है|
डेब्ट फंड्स खरीदने की टिप्स|
आम तौर पर, डेब्ट सिक्योरिटीज को रेटिंग CRISIL, CARE, FITCH, ICRA, जैसी एजेंसीज के द्वारा दी जाती है, ताकि वे डेब्ट सिक्योरिटीज की क्रेडिट योग्यता को जांच सके| इन सिक्योरिटीज की रेटिंग जान के आपको यह तसल्ली होगी की आपके फंड्स सुरक्षित है|
बाजार में कई तरह के डेब्ट फंड्स उपलब्ध होते है और आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से उन्हें चुन सकते है|
डेब्ट फंड्स के अनेक प्रकार होते है जैस की,
  • गिल्ट फंड
  • बॉन्ड फंड
  • लिक्विड फंड
  • अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन
  • लो ड्यूरेशन
  • शॉर्ट ड्यूरेशन
  • क्रेडिट रिस्क
गिल्ट फंड: गिल्ट फंड्स सिर्फ गोवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करते है| आम तौर पर, जो निवेशक चाहते है की उनके फंड्स कम जोखिमवाले एवं सुरक्षित रहे, वे गिल्ट फंड्स में निवेश करना पसंद करते है| इन फंड्स में लॉन्ग टर्म  मैच्योरिटी के साथ शॉर्ट टर्म  मैच्योरिटी भी उपलब्ध है|
बॉन्ड फंड: एक बॉन्ड फंड अनेक प्रकार के बॉन्ड्स जिनकी मैच्योरिटी अलग हो उनका मेल है| जब कोई एक बॉन्ड अच्छा परफॉर्म न कर  रहा हो तब इस बॉन्ड के  निवेशकों को कोई जोखिम नहीं क्योंकि अन्य बॉन्ड्स उसे सवार लेते है| ये बॉन्ड कई फिक्स्ड रिटर्न मार्गों में विविध है|
लिक्विड फंड: लिक्विड फंड आपके राशि को शॉर्ट -टर्म मनी मार्केट इंट्रूमेंट्स में निवेश करता है| यह इनसरमेंट्स की मैच्योरिटी ९१ दिन तक होती है| यह सिक्योरिटीज कम जोखिम वाली एवं इनके कीमत में उतार-चढाव की सम्भावना भी कम होती है|
अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन: इस फंड में भी निवेशक शॉर्ट टर्म इन्वस्टमेंट करते है, परंतु इसमें जोखिम की सम्भावना लिक्विड फंड से ज़्यादा होती है क्योंकि इस फंड की मैच्योरिटी ३ महीने से ६ महीने तक होती है| इसीलिए जो निवेशक १ साल तक निवेश करना चाहते है उनके लिए यह फंड अच्छा मन जाता है|
लो ड्यूरेशन: आम तौर पर, जो निवेशक १ साल से ज़्यादा का समय पसंद करते वे इस बॉन्ड को चुनते है| ल्क्विड फंड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड की तुलना में ये बॉन्ड काफी अच्छे रिटर्न्स देता है| इनके मैच्योरिटी ३ साल जितनी  होती है| जब शार्ट टर्म इंट्रेस्ट रेट ज़्यादा ऊपर हो तब वे अच्छा परफॉर्म करते है| यह बॉन्ड उन निवशकों केलिए उचित है जो बड़ी जोखिम लेने की काबिल है|

इक्विटी फंड क्या है? Equity Fund kya hai? Mutual fund types in Hindi 

इक्विटी फंड्स में निवेश करना मतलब बिज़नेस में ओनरशिप खरीदना| इस फंड में पब्लिकली ट्रेडेड स्टॉक्स में सबसे ज़्यादा निवेश किया जाता है| इस फंड में निवेश करने का सबसे अहम फयदा ये है की निवेशकों को कंपनी के डिविडेंड पर भी सामान अधिकार होता है|
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स खरीदने की टिप |
फंड का इतिहास स्थिर होना ज़रूरी है और जानकार फंड मैनेजर होना चाहिए|
मार्केट में कई सारे ऑप्शंस है इक्विटी फंड्स में निवेश करने केलिए, परंतु यह फंड उन निवेशकों केलिए सही माना जाता है जो जोखिम लेने के काबिल हो और बेहतर रिटर्न्स पाना चाहते है| इक्विटी म्यूचुअल फंड्स  के अनेक प्रकार है जैसे की,
  • लार्ज कैप म्यूचुअल फंड्स
  • मिड कैप म्यूचुअल फंड्स
  • स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स
  • सेक्टर फंड्स
  • फ्लेक्सी कैप म्यूचुअल फंड्स
लार्ज कैप म्यूचुअल फंड्स: जो फंड अपने कॉर्पस का बड़ा हिस्सा लार्ज कैपिटल मार्केट कंपनी या ‘द बिग फिश’ कहे जानेवाले कंपनी में करता है उसे लार्ज कैप म्यूचुअल फंड कहते है| आम तौर पे, यह फंड्स काफी अच्छेऔर स्थिर  रिटर्न्स देते है और इसमे जोखिम होने की सम्भावना मध्यम है| जो निवेशक ‘बाय एंड होल्ड’ में विश्वास रखते है उनके लिए यह फंड अच्छा साबित होता है|
मिड कैप म्यूचुअल फंड्स: जो फंड मिड साइज कॉर्पसवाली कपनियों में निवेश करता है, उसे मिड कैप म्यूचुअल फंड कहते है | इस फंड में जोखिम की सम्भावना काफी ज़्यादा होती है और कीमत में अस्थिरता भी ज़्यादा होती है| यह फंड जरूरी नहीं की मार्केट के हिसाब से चले, जब मार्केट स्थिर हो और अच्छा परफॉर्म कर रहा हो तब मिड कैप फंड ख़राब परफॉरमेंस दे सकता है| जोखिम की सम्भावना भी ज़्यादा प्रमाण में जुडी होती है| जो निवेशक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की चाह में हो वे इस फंड में निवेश कर सकते है|
स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स: आम तौर पर यह फंड उन कंपनियों में निवेश करता है जो बिज़नेस की शुरवात में है | यह कम्पनिया ज़्यादा फेमस न होने के कारण इनके फंड्स खरीदना फयदेमंद होता है, परंतु यह ज़रूरी है की निवेश करने से पहले आप कंपनी के रेकॉर्ड्स ठीक से जांच ले |
सेक्टर फंड्स: इस फंड में निवेश करने पे आप किसी एक सेक्टर के स्टोक्स में निवेश कर सकते है, इसी कारण इस फंड में विविधता नहीं है| परंतु यह बड़ी जोखिम वाली बात भी है क्योंकि अगर आपने निवेश किये हुए सेक्टर में मंदी आने पे आपका बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है| इसीलिए जो बड़ी जोखिम लेने के काबिल है वे इस सेक्टर में निवेश करे|
फ्लेक्सी कैप म्यूचुअल फंड्स: इस फंड में आपके ऊपर कोई भी बंधन नहीं होता, आप कोई भी कंपनी में आसानी से निवेश कर सकते है चाहे वो छोटी हो या बड़ी| इस प्रकार के फंड में मध्यम जोखिम होने की सम्भावना होती है|

बैलेंस्ड फंड क्या है? Balanced Fund kya hai? Mutual fund types in Hindi 

बैलेंस्ड फंड या हाइब्रिड फंड डेब्ट और इक्विटी का मिश्रण है | यह फंड नए निवेशकों केलिए सही माना जाता है| इस फंड का ध्येय इक्विटी और डेब्ट के मिश्रण से कैपिटल ग्रो करना है| बैलेंस्ड फंड के दो प्रकार है :
  • इक्विटी ओरिएंटेड
  • डेब्ट ओरिएंटेड
इक्विटी ओरिएंटेड: बैलेंस्ड इक्विटी फंड्स में निवेशकों को कम से कम ६५% का निवेश इक्विटी मार्केट में करना होता है| आम तौर पे, ये फंड्स एवरेज रिटर्न्स देते है परंतु जब मार्केट ठीक से परफॉर्म नहीं करता तब ये इक्विटी स्मॉल कैप या मिड कैप से कई अच्छे रिटर्न्स देते है |
डेब्ट ओरिएंटेड: बैलेंस्ड डेब्ट फंड्स में निवेशकों को कम से कम ६५% का निवेश डेब्ट मार्केट में करना होता है| यह फंड्स शॉर्ट टर्म बॉन्ड से काफी अच्छे रिटर्न्स देते है|

 

 

भाग २- म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है? Mutual fund kaise kaam karta hai?

               भाग ४- ग्रोथ या डिविडेंड

 

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